वाइब्रेंट विलेज मलारी मे औषधीय एवं सगन्ध पादपों पर आयोजित हुई संगोष्ठी।।

जोशीमठ,12अक्टूबर।
वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार के औषधीय एवं सगन्ध पादप विभाग द्वारा यहाँ सीमान्त गांव मलारी मे संगोष्ठी का आयोजन कर सीमान्त कृषकों को विभिन्न जानकारियां दी गई।
विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बी.पी. नौटियाल ने औषधीय पादपों की जानकारी के साथ ही सेब के बागवानों के विकास पर सीमान्त काश्तकारों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सीमान्त क्षेत्र के कृषक वर्षों से विशेष प्रकार की जड़ी बूटी का ब्यापार करते रहे हैं, लेकिन कुछ वर्षो से जंगलों मे जड़ी बूटी की उपलब्धता कम होने के कारण कई प्रकार की प्रजातियों के दोहन पर प्रतिबंध लगाया गया है।
प्रो0 नौटियाल ने औषधीय पादपों की सतत उपलब्धता बनाये रखने के लिए महत्वपूर्ण जड़ी बूटियों के उत्पादन व संरक्षण पर विस्तृत जानकारी दी।
विश्वविद्यालय के ही डॉ0 राजेन्द्र सिंह चौहान ने औषधीय पादपों के महत्व एवं क्षेत्रीय विकास के लिए जड़ी बूटी के माध्यम से रोजगार की संभावनाओं पर जानकारी दी।
संगोष्ठी मे मौजूद मलारी के ग्राम प्रधान मंगल सिंह राणा ने कहा कि सभी के सहयोग से  बृहद स्तर पर जड़ी बूटी की खेती पर विशेष जोर दिया जाएगा। कैलाशपुर के प्रतिनिधियों ने कहा कि गांव के जागरूक किसान काला जीरा व कुठ की खेती के लिए उन्नत किस्म के बीज एकत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं।
संगोष्ठी मे औषधीय पादप निदेशालय द्वारा तैयार की गई जड़ी बूटी की खेती पर आधारित वीडियो भी सीमान्त किसानों को दिखाई गई। 
औषधीय पादप विभाग के शोध छात्र प्रवीण कपरुवाण एवं कृष्णेन्दू देवनाथ ने नीती घाटी मे पिछले दस दिनों से औषधीय पादपों पर जुटाई गई जानकारी को सीमान्त कृषकों के सम्मुख प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कर्मचारी दिनेश नेगी, संदीप पोखरियाल, ताजबर सिंह रावत व केसर सिंह के अलावा मलारी, कैलाशपुर व गमशाली आदि गांवों के किसान मौजूद रहे।

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