ससरस्वती नदी का उदगम क्षेत्र भी बनेगा धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केन्द्र,योगी आदित्यनाथ ने घसतोली सीमा के पास पवित्र सरस्वती नदी का आचमन कर दिया संदेश।।

------- प्रकाश कपरुवाण।
जोशीमठ,09 अक्टूबर।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का श्री बद्रीनाथ एवं श्री केदारनाथ यात्रा का कार्यक्रम तो रहा ही,लेकिन बद्रीनाथ धाम पहुंचकर सीधे भारत-तिब्बत सीमा की अग्रिम चौकियों में जाकर सीमा प्रहरियों की हौसलाअफजाई करना भी रहा, इसके अलावा यहाँ पहुंचने का एक बड़ा धार्मिक कारण यह भी रहा कि उन्होंने प्रयागराज मे मिलने वाली पवित्र सरस्वती नदी जो घसतोली बॉर्डर के पास से बहती है का आचमन व पंचस्नान कर इस देवभूमि का महत्व भी समझा दिया।
  
दरसअल यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का श्री बद्रीनाथ एवं केदारनाथ का कार्यक्रम तो था लेकिन बद्रीनाथ धाम पहुंचकर अल्पविश्राम कर सीधे बॉर्डर का रुख किया, और घसतोली बॉर्डर के पास ही बहने वाली पवित्र सरस्वती नदी के तट पर जाकर पूजन व पवित्र जल का आचमन किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं योगी आदित्यनाथ द्वारा सनातन तीर्थो मे आवागमन व उनके विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य तो किया ही जाता है और इनके तीर्थस्थलों मे आने से देश विदेश के श्रद्धालुओं की संख्या तो बढ़ती ही है,आर्थिक गतिविधि भी तेजी से बढ़ती है।
अब योगी आदित्यनाथ ने भारत-तिब्बत सीमा की अग्रिम चौकी के समीप बहने वाली पवित्र सरस्वती नदी जो प्रयागराज में ही दृष्टिगोचर होती है का दर्शन/पूजन व आचमन कर एक नए धार्मिक क्षेत्र को सनातन धर्मावलंबियों के सम्मुख रख दिया है, निश्चित ही आने वाले समय मे श्री बद्रीनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालु सीमा दर्शन के साथ पवित्र सरस्वती नदी के दर्शन को भी लालयत रहंगे, राज्य के धार्मिक पर्यटन मे इजाफा होगा और रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे।
हालांकि  देश के पहले गांव माणा के समीप केशव प्रयाग में भी सरस्वती के दर्शन होते हैं,लेकिन योगी आदित्यनाथ द्वारा उदगम स्थल के समीप पहुंचकर पवित्र सरस्वती नदी का पूजन व आचमन ग्रहण करने से यह तो स्पष्ट हुआ ही कि उनके मन मे श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ यात्रा व सीमा प्रहरियों से भेंट के साथ पवित्र सरस्वती नदी के दर्शन का भी संकल्प रहा होगा।।
गौरतलब है कि बड़ाहोती के पार्वती ताल एवं माना पास स्थित देवताल मे विगत वर्षों से स्थानीय निवासियों का आवागमन बढ़ गया है। और अब इन सीमाओं तक जाने के लिए परमिट भी आसानी से प्राप्त हो रहा है।
उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले वर्षोँ मे सीमा दर्शन यात्रा भी आर्थिकी का एक नया जरिया बनेगा।

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