ताजे भूकंप के बाद जुगजू गाँव के ऊपर चट्टान का टूटना तेजी से हुआ शुरु।ग्रामीण राहत शिविर में।

--------------- प्रकाश कपरूवान ।
जोशीमठ,14 सितम्बर।
सीमान्त जनजाति गांव जुगजू के ऊपर चट्टान टूटने का क्रम लगातार जारी है, ग्रामीण गांव छोड़ कर राहत शिविर मे जीवन यापन करने को विवश हैं।
11सितम्बर को भूकंप के झटकों के बाद तो ग्रामीण सहमे हुए थे, क्योंकि वर्ष 1999 के भूकंप के बाद इस गांव के ऊपर चट्टान कहर बन कर टूटी थी, ग्रामीणों को ताजे भूकंप के बाद भी चट्टान के तेजी से टूटने की आशंका थी, जो बीती रात्रि को सही साबित हुई।
बीती रात्रि को करीब सवा नौ बजे चट्टान टूटना शुरू हुआ और रात्रि साढ़े बारह बजे तक छः बार चट्टान टूटकर गांव की ओर गिरी।
16परिवारों के जुगजू गांव पर चट्टान लगातार कहर बन कर टूट रही है, लेकिन शासन/प्रशासन इस गांव की सुध नहीं ले रहा।पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य संग्राम सिंह के अनुसार वर्ष 1999 के भूकंप के दौरान चट्टान टूटने की घटना के बाद वर्ष2000 मे भूगर्भीय सर्वेक्षण हुआ था, और जुगजू गांव को शीघ्र विस्थापन की आवश्यकता से शासन को अवगत कराया था,लेकिन 21 वर्षों के बाद भी गाँव को अपने हाल पर छोड़ दिया है।और ग्रामीण अपना घर-बार, खेत खलियान व मवेशियों को छोड़ कर राहत शिविरों में रहने को विवश हो गए हैं।
पूर्व बीडीसी मेम्बर ने कहा कि हालांकि स्थानीय प्रशासन ने राहत शिविर में सभी ब्यवस्थाये मुहैया कराई है, लेकिन आखिर कब तक शिविरों मे ही जीवन यापन करना होगा?

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