कालिंका देवरा यात्रा :- भर्की गाँव मे उमड़ा आस्था व परंपरा का सैलाब, ध्याणी भत्ता व न्यूतेर विदाई के साथ सम्पन्न हुई "देवरा रथ यात्रा "।

 ------------- प्रकाश कपरुवाण।

ज्योतिर्मठ।

     181दिन एक हजार किमी की नंगे पांव पद यात्रा के बाद भर्की गाँव की कालिंका मायाधार देवी देवरा रथ यात्रा ध्याणी भत्ता व न्यूतेर विदाई के साथ रविवार को संपन्न हुई, पंचनाम देवता चौक के बाद बानातोली मे आयोजित विभिन्न धार्मिक परंपराओं के अनुसार हुए कार्यक्रमों मे आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, सैकड़ों की संख्या मे दूर दूर से पहुंची ध्याणियां, तीन गावों के न्यूतेर व हजारों की संख्या मे पहुंचे भक्तों ने माँ कालिंका का दर्शन पूजन के आशीर्वाद प्राप्त किया।

      35 वर्षों के बाद आयोजित हुई माँ कालिंका मायाधार देवी देवरा रथ यात्रा मे भर्की, भेटा, पिलखी, आरोसी व ग्वाणा गाँव के युवाओं व महिला मंगल दलों की एकता व टीम भावना का भी बेहतर प्रदर्शन दिखा। यूँ तो माँ कालिंका मायाधार देवी अपने गर्भ गृह से नौ माह पूर्व 20जुलाई 2025 को बाहर निकली थी, गाँव मे ही विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों व परंपराओं के निर्वहन के उपरांत 281दिवस छः माह गाँव से बाहर जोशीमठ एवं दशोली प्रखंडो के दूरस्थ गावों व देवालयों मे पहुंचकर देव भेंट व ध्याणी मिलन हुआ।

      देवरा रथ यात्रा मे साथ चल रहे देवरी, धारी व देवताओं के पश्वा की भूमिका किसी साधक से कम नहीं होती, नंगे पांव बीहड़ रास्तों से गुजरकर हर दिन एक नए गाँव मे पहुंचकर ध्याणी व देवमिलन करना खासकर नई पीढ़ी के युवाओं के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था, परन्तु माँ कालिंका मायाधार देवी के प्रति आस्था व बड़े बुजुर्गों के मार्गदर्शन से नौ माह की देवरा यात्रा बिना किसी बिघ्न के सम्पन्न हुई। इस यात्रा के दौरान 98गावों मे 181 ध्याणियों ने ध्याण भत्ता दिया तो 435 लोगों ने सूप्पा दिया।

      देवरा रथ यात्रा 181 दिनों तक जोशीमठ एवं दशोली प्रखंडों के विभिन्न दूरस्थ गावों के साथ ही श्री बद्रीनाथ धाम, रुद्रनाथ, माता अनसूया देवी मंदिर, गोपीनाथ मंदिर, सिद्ध पीठ लाता नंदा देवी, रैणी काली, माणा घन्याल, बसुधारा, डुमक बजीर देवता, नृसिंह-नव दुर्गा मंदिर ज्योतिर्मठ, चंडिकामंदिर रविग्राम सहित मंडल घाटी, सलूड़ डुंग्रा कुंजो मैकोट, उर्गम व नीती-माणा घाटियों के विभिन्न गावों मे ध्याणी मिलन व देव भेंट कर तय समय के अनुसार अपने गाँव भर्की के पंचनाम चौक पहुंची जहाँ पर बनातोली मे पहुँचने से पूर्व की सभी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन हुआ।

    देवरा रथ यात्रा से पूर्व मान्य धार्मिक परंपरा के अनुसार सबसे पहले गणेश पेत्तू रखा जाता है जिसका मतलब भगवान गणेश से गाँव मे रिद्धि सिद्धि होने पर देवरा यात्रा का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद ही ज्योतिष गणना के बाद निकाले गए मुहूर्त पर भगवती माँ कालिंका एवं मायाधार देवी गर्भ गृह से बाहर निकलकर पंचनाम देवता मंदिर मे पहुँचती है जहाँ प्राण प्रतिष्ठा के बाद रथ डोली जम्माण व लाठ पर सुसज्जित किया जाता है, देवी भगवती के बाहर निकलने के बाद तय समय पर मुखौटा भी बाहर निकलते हैं।

      मुखौटों मे नारद वेदी-वेदा गणेश ब्रह्मा कोड़िया, कनड़ू, कालिंका, गानी-गन्ना, ईश्वर, शंकर भगवान के साथ ही देवताओं के ज्योतिषी नत्थू पांडे प्रमुख हैं, देवरा यात्रा के दौरान जहाँ भी प्रवास होता है वहाँ मुखौटा नृत्य अवश्य होता है।

 न्यूतेर आगमन से पूर्व आयोजित ध्याणी भत्ता मे करीब आठ सौ ध्याणी व सूप्पा देने वाले लोग विशेष रूप से सम्मलित हुए जिनके भोजन प्रसाद एवं देवताओं द्वारा विदाई की व्यवस्था अलग स्थान पर हुई थी जबकि हजारों अन्य श्रद्धालुओं के लिए भी भोजन प्रसाद की व्यवस्था अलग अलग स्थानों पर की गई थी।

    जिन तीन गावों के न्यूतेर गाजे बाजों, छड़ी-कटार व निशाण के साथ पहुंचे उनमे थैंग के जाख देवता, उर्गम के घण्टाकर्ण देवता व पल्ला गाँव के पल्ला पावे-भूमियाल देवता प्रमुख थे।

     10 जुलाई 2025 से 22 फरवरी 2026 तक माँ कालिंका देवरा रथ यात्रा का सफल आयोजन करने वाली मेला कमेटी के अध्यक्ष हर्षबर्धन फर्शवाण, सचिव रघुबीर सिंह चौहान, कोषाध्यक्ष नंदा सिंह नेगी, उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह रावत, भगवती के पुजारी गुडबीर चौहान, आचार्य प्रशांत सेमवाल व अतुल डिमरी, के अलावा भूमियाल देवता के पश्वा लक्ष्मण सिंह नेगी, दाणी देवता के पश्वा रणजीत सिंह चौहान, नंदा देवी के पश्वा बलबीर सिंह चौहान, कालिंका माता की पश्वा कातिकी देवी, भगवती राज राजेश्वरी की पश्वा आरती देवी, माता वैष्णो की पश्वा पार्वती कंडवाल तथा स्वनुल के पश्वा अनिल पंवार के साथ ही जागर वेता लक्ष्मण सिंह पंवार व रघुबीर सिंह चौहान, देवरा रथ यात्रा के साथ चलने वाले धारी अशोक चौहान, प्रदीप चौहान, महेन्द्र रावत, अरविन्द फर्शवाण, दर्शन सिंह, प्रताप सिंह व सुभाष रावत आदि थे जबकि भान व ढोल वादक के रूप मे दीपक चंद्र, जयदीप, प्रदीप व कुंदन महत्वपूर्ण भूमिका मे रहे।

     महिला मंगल दल भर्की की अध्यक्ष रमा देवी, भेटा की अध्यक्ष कुसुम पंवार, पिलखी की आशा नेगी व आरोसी की मंजू चौहान के नेतृत्व मे महिलाओं ने मेला कमेटी द्वारा दी गई जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन किया।

  भर्की के पूर्व प्रधान दुलब सिंह रावत के अलावा महाबीर चौहान, महेन्द्र चौहान, गिरीश रावत, हरीश रावत देवेन्द्र पंवार, नैन सिंह नेगी, कमलेश रावत व बलबीर सिंह नेगी सहित युवक व महिला मंगल दलों के प्रतिनिधि आगंतुक अथितियोंके स्वागत सत्कार मे जुटे रहे।

   सामाजिक संस्था जनदेश के सचिव लक्ष्मण नेगी ने जोशीमठ व दशोली के 98 गावों मे देवरा यात्रा को मिले सम्मान के प्रति सभी ग्रामवासियों, ध्याणियों व भक्तजनों का मेला कमेटी की ओर से आभार व्यक्त किया है।

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