ज्योतिर्मठ।
भगवान श्री नृसिंह-नव दुर्गा के सानिध्य एवं आद्य जगदगुरु शंकराचार्य की तपो भूमि ज्योतिर्मठ नगर मे शहरी वातावरण के बीच पौराणिक एवं धार्मिक मान्य परंपराओं का बखूबी निर्वहन कर रही है "देव पूजाई समिति" ज्योतिर्मठ।
इन दिनों भूमि के रक्षक जाख देवता नगर भ्रमण पर निकले हैं और इस भ्रमण कार्यक्रम को आज की नई पीढ़ी भी पूरे मनोयोग व धार्मिक अनुष्ठान के साथ पूरा कर रही है।
जाख देवता हर तीसरे वर्ष गाँव/नगर भ्रमण के लिए अपने मूल स्थान से बाहर आते हैं, परंपरानुसार माघ माह की दूसरी तिथि "दो गते" अपने स्थान से बाहर आते हैं और 17दिनों तक नगर भ्रमण कर माघ मास की 18वीं तिथि "18गते" को अपने मूल स्थान पर वापस जाते हैं।
इस दौरान जाख देवता पूरे नगर का भ्रमण कर ग्रामीणों की भेंट स्वीकार करते हैं, इसी वर्ष जोशीमठ नगर के मारवाड़ी मे जाख देवता के नव निर्मित मंदिर मे जाख देवता की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम भी आयोजित हुआ।
परंपरा के अनुसार हर तीसरे वर्ष न केवल जोशीमठ के बल्कि रविग्राम के साथ ही नजदीकी गाँव चांई व थेंग के जाख देवता भी ग्राम भ्रमण व देव मिलन के लिए अपने अपने मूल स्थानों से बाहर आते हैं,इसी दौरान एक तय तिथि को तीनों गावों के जाख देवता जोशीमठ के जाख देवता से देव भेंट हेतु जोशीमठ पहुँचते हैं, इस वर्ष थेंग गाँव के जाख देवता धार्मिक कारणों से गाँव की परिधि से बाहर नहीं जा सकते थे, लेकिन रविग्राम एवं चांई गाँव के जाख देवता देव मिलन के लिए जोशीमठ के नृसिंह मंदिर मठागण पहुंचे जहाँ तीनों जाख देवताओं के मिलन का अदभुद दृष्य व विभिन्न तालों पर जाख देवताओं को नचाने का कार्यक्रम हुआ जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या मे लोग मठागण पहुंचे थे।
देव पूजाई समिति जोशीमठ के अध्यक्ष अनिल नंबूरी के अनुसार देव पूजाई समिति श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अभिन्न अंग के रूप मे जोशीमठ के श्री नृसिंह-नव दुर्गा मंदिरों मे आयोजित होने वाले सभी प्रकार के अनुष्ठानों का धार्मिक रीति रिवाजों व मान्य धार्मिक परंपराओं के अनुरूप निर्वहन करती है।
उन्होंने जाख देवता भ्रमण कार्यक्रम मे सहयोग के लिए सभी ग्राम वासियों, समिति के पदाधिकारियों एवं नव युवकों का आभार ब्यक्त किया है।


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