संस्कृत छात्र प्रतियोगिता:-संस्कृत ज्ञान-विज्ञान की भाषा:-आचार्य भुवन चन्द्र उनियाल ।।

जोशीमठ,27सितंबर।
 श्री बदरीनाथ वेद वेदांग संस्कृत विद्यालय जोशीमठ में उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा आयोजित संस्कृत छात्र प्रतियोगिता के द्वितीय दिवस का उद्घाटन श्री बद्रीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी आचार्य भुवन चन्द्र उनियाल ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ माँ सरस्वती के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलित कर किया।
उन्होंने अपने सम्बोधन में संस्कृत  को ज्ञान ,विज्ञान की भाषा बताया। विशिष्ट अतिथि राजकीय महाविद्यालय के असिटेंट प्रोफेसर डॉक्टर चरणसिंह राणा "केदारखण्डी" ने कहा कि संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति एक दूसरे का पर्याय हैं, उन्होंने कहा कि संस्कृत में भी भारत अपने सम्पूर्ण स्वरूप में अभिव्यक्त होता है। 
केदारखण्डी ने संस्कृत भाषा को लेकर महर्षि श्रीअरविन्द के विचारों की मीमांसा करते हुए कहा कि श्रीअरविन्द संस्कृत को भारत की राष्ट्रभाषा बनते हुए देखना चाहते थे। इस तरह के आयोजनों से संस्कृत और संस्कृति के लिए वातावरण निर्मित होता है।
आज कनिष्ट वर्ग की प्रतिस्पर्धा सम्पन्न हुई।
 
आचार्य वाणी विलाश डिमरी के संचालन मे हुए कार्यक्रम में खंण्ड संयोजक अरविंद प्रकाश पंत ने समस्त अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के माध्यम से उत्तराखंड सरकार संस्कृत के प्रसार और प्रचार के लिये प्रतिबद्ध है।
 निर्णायक मंडल के भगत सिंह राणा हिमाद , आशा पंवार व लक्ष्मी प्रसाद त्रिपाठी से प्राप्त निर्णयों की समीक्षा की।
विद्यालय के शिक्षक  गौर सिंह खत्री ने समस्त  प्रतिभागियों और प्रभारी शिक्षक शिक्षिकाओं को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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