-------- अनसूया प्रसाद मलासी ।
अगस्त्यमुनि,21अगस्त।
हिमवंत कवि चंद्र कुँवर बर्त्वाल का जन्मदिन उनके गांव पंवालियां में मनाया गया। साहित्यिक और सामाजिक संस्था कलश द्वारा इस अवसर पर एक कवि सम्मेलन का आयोजन कर कवि को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पंवालियां का संरक्षण करते हुए यहां शोध केंद्र बनाने और कवि के खंडहर हो चुके मकान को संरक्षित करते हुए स्मारक बनाने की मांग की गई।
कलश के अध्यक्ष ओमप्रकाश सेमवाल के संयोजन में हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ख्यातिप्राप्त कवि मुरली दीवान थे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता अनसूया प्रसाद मलासी ने की। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि बुध्दिबल्लभ भट्ट, माधव सिंह नेगी, हेमंत चौकियाल, श्रीमती उर्मिला सेमवाल व श्रीमती सतेश्वरी नेगी थे।
कवि चंद्रकुँवर बर्तवाल की रचनाओं का सस्वर वाचन
कार्यक्रम का संचालन करते हुए कलश के संयोजक ओमप्रकाश सेमवाल ने चंद्र कुँवर बर्त्वाल की कविता लयवद्ध तरीके से पढ़कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया -
मंदाकिनी तू मंद गति से, मस्तानी तू चलदी री।
कल-कल करदी कितना काल से, नीं थकदी तू चलदी री।
मनमोहन भट्ट ने कवि की रचना पढी़-
प्यारे समुद्र मैदान जिन्हें, उनको नित हों वही प्यारे।
मुझको तो हिम से भरे हुए, अपने पहाड़ ही प्यारे।।
कवि बुद्धिबल्लभ भट्ट ने-
कैलासों पर उगते ऊपर, रैमासी के दिव्य फूल।
मां गिरिजा दिन भर चुन, जिनसे भरती अपना दुकूल।।
शिक्षक हेमंत चौकियाल ने कवि चंद्र कुँवर बर्त्वाल का जीवन परिचय सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया।
कुसुम भट्ट ने कविता पढी़-
अब न रुकेगा किसी तरह भी, मेरा जाता जीवन।
अब लेगी विश्राम शांत,अति मेरे उर की धड़कन।।
माधव सिंह नेगी ने गाया-
मुझको डुबो निज काव्य में, हे स्वर्गतरि मंदाकिनी।।
वीर रस के कवि जगदंबा चमोला ने अपनी लंबी रचना पढी़-
तुम जुल्फ झूमती आ जाओ प्रिये!
युवा कवयित्री वेदिका सेमवाल ने स्वरचित गढ़वळि कविता सुनाई-
ना कर जिक्र, ना कर फिक्र, मेरा ये पहाड़ मा...
कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि मुरली दीवान ने सुनाया-
खेती-पाती कर, गोरु-बाछलु पाळ,
भुला, तू कुछ करदि रौ।।
कार्यक्रम अध्यक्ष अनसूया प्रसाद मलासी ने इस बात पर दुःख व्यक्त किया कि तीन दशक पहले पंवालिया में कवि की स्मृति में भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ था। उस समय हमने कवि के जर्जर हो रहे पैतृक मकान की तिबार और छज्जे में बैठ कर फोटो खिंचवायी थी। मगर अधिकारियों, शासन और जन-प्रतिनिधियों द्वारा कोई गंभीर रुचि नहीं दिखाई और जमीन की सुध नहीं लेने के कारण आज यह मकान खंडहर बन गया है। जबकि इस दौरान कई बार कवि की स्मृति में पंवालिया में कार्यक्रम हुए हैं और जनप्रतिनिधियों द्वारा आश्वासन मिलते रहे हैं। अभी भी वक्त है, इसे संभालने का, अगली पीढ़ी को विरासत में देने का।
मालकोटी गाँव में भी कवि की मूर्ति पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए
दूसरी तरफ चंद्र कुंवर बर्त्वाल का जन्मदिन उनके मूल गाँव मालकोटी में ग्राम वासियों द्वारा मनाया गया। इस अवसर पर ग्राम वासियों द्वारा कवि की जीवनी एवं कविताओं पर प्रकाश डाला गया। कवि की मूर्ति पर मात्यार्पण भी किया गया। महिलाओं द्वारा कीर्तन किया गया।
कार्यक्रम में समस्त ग्रामवासी समलित हुए, जिसमें अजीत सिंह, दिलवान सिंह, चंदन सिंह, वीरपाल सिंह, दिग्विजय सिंह, युद्धवीर सिंह, किशन सिंह, धीरेंद्र सिंह, महावीर सिंह , इशांत, कुलबीर सिंह एवं महिलाएं शामिल हुई।
0 टिप्पणियाँ