जोशीमठ,23फरवरी।
आध्यात्मिक विभूति, योगी और श्री अरविन्द आश्रम पॉन्डिचेरी की प्राणशक्ति श्री माताजी (द मदर) का 144वां जन्मदिन श्री अरविन्द अध्ययन केंद्र जोशीमठ के साधकों ने धूमधाम से मनाया और भारत और विश्व को लेकर श्री माताजी की शिक्षा, कर्म और सन्देश का पुनर्पाठ किया ।
सर्वप्रथम दीप प्रज्वलन और मंत्र ध्यान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ ।
केंद्र के अध्यक्ष और संस्कृत महाविद्यालय जोशीमठ के प्राचार्य अरविंद पंत ने सारगर्भित ठंग से श्री माताजी और श्री अरविन्द के जीवन सन्देश पर प्रकाश डाला और उनके संदेश को युद्ध, आतंक, भय और भूख के सदमों में जी रही इस दुनिया के लिए रामवाण बताया।
केंद्र के सचिव और साधक द्रवेश्वर प्रसाद थपलियाल ने श्री माताजी को स्मरण करते हुए कहा कि भारत और भारतीयों के लिए श्री माताजी ने जो किया उसे अभी पूरी तरह समझा जाना बाकी है।
राजकीय इंटर कॉलेज जोशीमठ के प्रधानाचार्य और केंद्र के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजकिशोर सुनील ने कहा कि माताजी ने नारी शक्ति, शिक्षा, राष्ट्र निर्माण, व्यक्तिगत जीवन में अनुशासन जैसे मूल्यों की दृष्टि से उन्हें प्रेरित किया है। उन्होंने युवा पीढ़ी को श्री अरविन्द अध्यन्न केंद्र का पूरा लाभ उठाने की अपील की। संयुक्त सचिव महावीर प्रसाद फर्स्वाण ने कहा कि पॉन्डिचेरी का भारत में सहज विलय, मानव एकता के तीर्थ के रूप में 28 फरवरी 1968 को स्थापित ऑरोविल और भारत पाकिस्तान युद्ध(1971) में बांग्लादेश मुक्ति में अपनी आध्यात्मिक सहायता देने के लिए श्री माताजी को हमेशा याद किया जाएगा।
केंद्र के संस्थापक सदस्य और श्री अरविन्द पर गढ़वाल विश्वविद्यालय से पहले पीएचडी डॉ. चरणसिंह केदारखंडी ने *श्री माताजी का कार्य और उसमें हमारी भूमिका* विषय पर बोलते हुए श्री माताजी की जीवन यात्रा, उनकी श्री अरविन्द के आध्यात्मिक कार्य और साधना में केंद्रीय भूमिका, मानव जीवन के अनेक आयामों में माताजी के संदेश की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बुद्धि के स्थान पर मन की निर्मलता और हृदय का पूरा और सच्चा समर्पण श्री माताजी के पास जाने की चाबी है।
डॉ. केदारखंडी ने श्रीमती इंदिरा गांधी के उस पत्र का विशेष उल्लेख किया जो उन्होंने 1971 की लड़ाई के उपरांत धन्यवाद स्वरूप श्री माताजी को लिखा था।
कार्यक्रम में केंद्र के कोषाध्यक्ष कैलाश भट्ट, सौरभ सती, विशाल मेहता आदि उपस्थित रहे। ध्यान के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
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