---------------– लक्ष्मण नेगी"कल्पवीर"
उर्गम घाटी( जोशीमठ) पंच केदार व पंच बद्री की धरती उर्गम में आजकल पांडव नृत्य की धूम मची हुई है। कल्प क्षेत्र की धरती में पांडवों का भव्य नृत्य का आयोजन किया जा रहा है। वैसे तो पांडव नृत्य का आयोजन गढ़वाल और कुमाऊं में प्रतिवर्ष होता है, इस वर्ष उर्गम घाटी में दस वर्षों के अंतराल में यह आयोजन किया जा रहा है।
लोक मान्यताओं के अनुसार पांडव नृत्य विशेष रूप से तब किया जाता है जब क्षेत्र में विशेषकर के गाय को खुर पका, मुंह पक्का रोग की संभावना रहती है इसके साथ ही इष्ट देव घंटाकर्ण जी का आदेश मिलने के बाद भी मेले का आयोजन किया जाता है।
मान्यता है कि अर्जुन के आठ नामों का उच्चारण किया जाए तो खुरपका रोग नहीं होगा, उर्गम क्षेत्र के ईष्ट देव घंटाकर्ण की आज्ञा से इस वर्ष यह आयोजन किया जा रहा है ।पूरी घाटी में पांडव के द्वारा हर एक दिन गांव में घर घर जाकर नृत्य किया जाता है, गांव में ग्रामीणों के द्वारा बनाया हुआ भोग प्रसाद को ग्रहण किया जाता है लोगों की आस्था है कि अवतारी पुरुषों महिलाओं के पांडवों के प्रतीक स्वरूप जब गांव भ्रमण किया जाता है उस समय प्रसाद ग्रहण करना पुण्य माना जाता है लोग अपने अपने गांव में पांडव देवताओं के निशान एवं अवतारी पुरुषों को ले जाकर भव्य रूप से उन्हें आदर सत्कार करते हैं और विशेष करके घी मक्खन का चौपड़ करते हैं इससे घी दूध का भंडार बना रहे ऐसी मान्यता है ढोल दमाऊ,भँवकरा इस नृत्य की आत्मा है जिससे ताल छंद एवं गायन के माध्यम से इस कार्यक्रम का संचालन किया जाता है लोगों का मानना है कि पांडव काल में जिन जिन स्थानों में पांडवों ने भ्रमण किया था उन स्थानों पर पांडवों की पूजा होती है पांडवों के द्वारा विभिन्न प्रकार की लीलाएं की गई उनका बखान इस पांडव नृत्य के दौरान किया जाता है। पांडव नृत्य के माध्यम से ग्रामीण एकता और भाई चारा एवं प्रेम सौहार्द एकता में बांधने का काम करती है उरगम घाटी के मेला कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह सिंह रावत बताते हैं इस नृत्य के माध्यम से लोगों में सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति रुचि पैदा होती है और हमारी संस्कृति का प्रसार बढ़ता है उन्होंने कहा कि पांडव नृत्य की जो विधाएं आज है वह मौखिक रूप से सैकड़ों वर्षो से चली आ रही है इसका किसी तरह की गांव में लिखित गाथा नहीं है फिर भी यह कार्यक्रम चलती रहती है उन्होंने कहा कि हमने इस मेले को भव्य रूप देने के लिए थोड़ा बहुत परिवर्तन किया है किंतु मूल रूप पर छेड़खानी नहीं की है अभी तक पांडवों का मंचन ग्राम पंचायत सलना, ल्याँरी, थैणा, पंचधारा, गीरा, वाशा, राँता, खोली, देवग्राम उरगम हो चुका है प्रतिदिन अलग-अलग तोको में नृत्य का मंचन होता है और गांव की मुख्य स्थान पर जिसे देव खोला कहते हैं यहां पर रात एवं दिन में नृत्य का मंचन होता है इस मंचन में एक दर्जन से अधिक महिला पुरुषों के द्वारा नृत्य की जिम्मेदारी निर्वहन की जाती है। घर घर जाकर के अवतारी महिला/ पुरुषों के द्वारा लोगों को आशीर्वाद दिया जाता है ।
समिति के कोषाध्यक्ष रघुवीर सिंह नेगी, गणियाँ कुंवर सिंह चौहान,व वारीगण इस कार्यक्रम में सहयोग कर रहे हैं।
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