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1---केन्द्रीय विद्यालय जोशीमठ-सुनील।
2--औली रोड सुनील में हुआ भूस्खलन।
-------------------------प्रकाश कपरूवान।जोशीमठ,29 अक्टूबर।
जोशीमठ नगर क्षेत्र में कई स्थानों पर हो रहे भूस्खलन के कारण जोशीमठ के अस्तित्व पर खतरा बढ़ गया है।बीते दिनों हुई वर्षात के बाद भारी भूस्खलन होने से सिंहधार-नरसिंह मंदिर मोटर मार्ग बन्द है तो पिछले एक सप्ताह से केंद्रीय विद्यालय भी बंद है।
जोशीमठ नगर की तलहटी मे सेमा गाँव ,मारवाड़ी से लेकर होसी जीरो बैंड तक का पूरा क्षेत्र पहले ही भूस्खलन की जद में है, और वहाँ रह रहे ग्रमीणों ने सुरक्षित स्थानों पर अपना आशियाना बना लिया है।लेकिन अब जोशीमठ नगर के सिंहधार-नरसिंह मंदिर सड़क भूधसावँ के कारण बन्द है तो जोशीमठ के शीर्ष पर सुनील क्षेत्र मे हुए भूस्खलन ने जोशीमठ के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है।
सुनील आईटीबीपी कैम्पस मे स्थित केंद्रीय विद्यालय जोशीमठ पिछले एक सप्ताह से बन्द है, भूस्खलन के कारण विद्यालय की दीवालें टूटने व परिसर मे दरारें पड़ने से बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए विद्यालय बंद करना पड़ा है, हालांकि विद्यालय की ऑनलाइन पढ़ाई जारी है।
दरसअल जोशीमठ की भूगर्भीय स्थिति व भविष्य में खतरे की आशंका को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1976 मे तत्कालीन गढ़वाल कमिश्नर महेश चंद्र मिश्रा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया था, जिसमे भूगर्भ वेत्ता,पर्यावरण विद, वैज्ञानिक, सिंचाई विभाग, सेना व आईटीबीपी के साथ ही जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया था,।
कमेटी ने ब्यापक भूगर्भीय अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि जोशीमठ नगर रेत के टीले पर बसा एक नगर है, इसके निचले क्षेत्र अलकनंदा तट के आसपास खनन, विस्फोट, व पत्थरों के टिपान प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, साथ ही कमेटी ने इस पूरे क्षेत्र मे बृहद पौधरोपण किये जाने की सिफारिश भी की है।
गौरतलब है कि वर्ष 1991 मे मिश्रा कमेटी की इस रिपोर्ट को ही आधार मानते हुए हेलंग-मारवाड़ी वाई पास निर्माण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी।
लेकिन अब जोशीमठ नगर मे लगातार हो रहा भूस्खलन निकट भविष्य में कहीं बडे खतरे के रूप मे सामने आए इससे इंकार नहीं किया जा सकता।
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