जोशीमठ,13सितम्बर।
सीमान्त पैनखंडा वासी भालूओं के हमलों, व भूस्खलन की घटनाओं से पहले ही चिन्तित थे, अब भूकंप के ताजे झटकों से सहमे हुए हैं।
बीती11सितम्बर को भूकंप के झटकों से हालांकि कोई नुकसान नहीं हुआ लेकिन इस झटके ने उत्तराखंड के उत्तरकाशी व चमोली की भूकंप की यादें अवश्य ताजा कर दी।
सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं तो बढ़ी हैं लेकिन नीती घाटी के तमक की चट्टान एवं जुगजू गांव के ऊपर से बिन वर्षात ही चट्टानों के टूटने की घटना से भी लोग खासे परेशान हैं।
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से बद्रीनाथ हाई-वे करीब-करीब रोज ही अवरुद्ध हो जाता है, अन्य ब्रान्च रोड भी भूस्खलन के कारण बन्द पड़ी हैं।
भूस्खलन, चट्टान टूटने की घटना व भूकंप के झटकों से सहमे सीमान्तवासियो को भालूओं के आतंक ने रतजगा के लिए विवश कर दिया है।भालू नगदी फसलों को तो चौपट कर ही रहे हैं, मानव जाति के लिए भी खतरा बने हुए हैं। अकेले जोशीमठ नगर के रविग्राम में ही भालू अब तक चार लोगों को घायल को घायल कर चुका है।
कुल मिलाकर रैणी-तपोवन की आपदा का दंश झेल रहे सीमान्तवासी अब चट्टान टूटने, भूस्खलन, भूकंप व भालू के हमलों से बेहद सहमे हुए हैं।
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