जोशीमठ,13सितम्बर ।
सीमावर्ती विकास खण्डों में अब मुख्यमंत्री बार्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत भी विविन्न विकास कार्य किये जायेंगे।पहली बार शुरू हुई इस योजना से अब बार्डर एरिया के गांवों के अलावा सीमान्त विकास खण्ड के निचले इलाकों के गांवों में भी विकास कार्य हो सकेंगें।
भारत-चीन व भारत-नेपाल बार्डर से सटे विकास खण्डों मे यूँ तो केन्द्र सरकार द्वारा बार्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत विभिन्न विकास कार्यों के लिए धनराशि अवमुक्त की जाती है, जिसको बार्डर एरिया से 10 किमी के गांवों मे विकास कार्यों पर ब्यय किया जा सकता है।केंद्रीय मद से नीती-माना घाटियों के साथ ही श्री बद्रीनाथ धाम में भी अनेकों विकास कार्य संपादित हुए हैं।
अब पहली बार उत्तराखंड सरकार ने बार्डर एरिया के सम्पूर्ण विकास खण्डों मे विकास कार्यों को करने के लिए इस योजना में सम्मलित करने के लिए मुख्यमंत्री बार्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किया है ।
पहली बार शुरु हुई इस योजना में सीमान्त विकास खण्ड जोशीमठ के निचले इलाकों के गांवों तपोवन, ढाक, जाखोला, उर्गम--कल्पेश्वर, द्वी ग--तपोन,देवग्राम, कुंडिखोला, पैनी व रैणी आदि मे विभिन्न विकास कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृत हुई है, इसी मद से चिपको की धरती रैणी मे *चिपको आंदोलन थीम पार्क*का निर्माण भी किया जाएगा।
जनपद चमोली के परियोजना निदेशक प्रकाश रावत के अनुसार केन्द्र सरकार से बार्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत जारी धनराशि को बार्डर एरिया के गांवों में ही ब्यय करने की बाध्यता है, लेकिन अब मुख्यमंत्री बार्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू होने से सीमान्त विकास खण्ड जोशीमठ के निचले इलाकों के गाँव भी कबर हो सकेंगें ।
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