मंदिरों को तोड़ा जाना धर्म पर प्रहार---शंकराचार्य।

-----------------------प्रकाश कपरूवान ।
जोशीमठ,28 सितम्बर।
सीमान्त चमोली जनपद के हाट गांव में प्रशासन और टीएचडीसी द्वारा पौराणिक मंदिरों को तोड़े जाने पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने नाराजगी व्यक्त करते हुए इस कृत्य को धर्म पर प्रहार बताया। उन्होंने इसके दोषियों को कड़ी सजा  देने की मांग मुख्यमंत्री से की है।उल्लेखनीय है, कि  पीपलकोटी के हाट गांव में कंपनी और प्रशासन की संयुक्त टीम ने पुलिस बल के साथ गांव के पौराणिक मंदिरों के साथ कई लोगों के भवनों पर बुलडोजर चलवाया जिस पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने हरिद्वार में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान मुख्य मंत्री के सम्मुख इस कृत्य पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। शंकराचार्य ने कहा कि इस तरीके से पौराणिक मंदिरों को तोड़ा जाना धर्म पर प्रहार है। कहा कि यदि इसी तरीके से धर्म पर चाबुक चलेगा तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शंकराचार्य ने कहा कि उत्तराखंड देवों की भूमि है। और हमारे पौराणिक मठ मंदिरों को क्षति पहुंचाने का प्रशासन को कोई अधिकार नहीं है। शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कहा कि जिन लोगों ने मंदिर को क्षति पहुंचाने का दुस्साहस किया है। उनके खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए।शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म पर कुठाराघात बर्दास्त नहीं किया जाएगा, उन्होंने हिन्दू संगठनों को आगे आकर तीव्र विरोध करने का आवहान किया, ताकि कोई भी देवभूमि की धर्म-संस्कृति को नष्ट करने  का दुस्साहस न कर सके।


ज्योतिर्मठ  पीठ पुरोहित ऋषि प्रसाद सती ने हाट गांव में पौराणिक मंदिर और लोगों के भवनों पर बुलडोजर चलाए जाने पर प्रशासन के खिलाफ  नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का यह तानाशाही रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है, कि प्रशासन की इस एकतरफा कार्यवाही के कारण लोगों को पितृपक्ष में अपने पुरखों का श्राद्ध करने से वंचित रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशासन का मंदिर तोड़ना और मूर्तियों को खंडित करना धर्म और धर्मावलंबियों के हृदय पर कुठाराघात है।

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