हिमालयी धाम फ़्यूला नारायण के कपाट बन्द हुए, बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद ।

------------------- प्रकाश कपरूवान ।
जोशीमठ,15 सितम्बर।
पूरे विधि विधान एवं धार्मिक परम्परा के साथ उच्च हिमालयी धाम भगवान फ़्यूला नारायण के कपाट अगले वर्ष श्रावण संक्रांति तक के लिए बन्द किए गए।
पंच बदरी एवं पंच केदारों की धरती उर्गम घाटी के शीर्ष पर करीब दस हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित भगवान फ़्यूला नारायण के कपाट नंदाष्टमी के पावन पर्व पर तय मुहूर्त पर बन्द किए गए।
भगवान फ़्यूला नारायण का मन्दिर उच्च हिमालयी बुग्याल के बीचों बीच एक सुरम्य स्थान पर है, यहां पूजा परम्परा भी अनूठी है, नियमित पूजा के लिए पुरुष पुजारी के साथ महिला पुजारिन भी होती है, जो गांव के द्वारा अपने क्रम के अनुसार नियुक्त होते हैं।
मान्य धार्मिक परंपरानुसार प्रतिदिन भगवान के स्नान के लिए जल व श्रृंगार के लिए पुष्प महिला पुजारिन द्वारा ही लाए जाते हैं,और महिला पुजारिन दस वर्ष से कम की कन्या अथवा 55 वर्ष से अधिक की महिला ही होती है।
इस वर्ष पुरूष पुजारी हरीश चौहान थे जबकि महिला पुजारिन गोदाम्बरी देवी थी,जो श्रावण संक्रांति से अनवरत धाम मे रहकर पूजा परम्परा का निर्वहन करते रहे। कपाट बंद किए जाने के बाद वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान नारायण के मन्दिर की परिक्रमा की।
इस अवसर पर रणजीत सिंह चौहान, उजागर फर्सवाण, मुकेश कंडवाल, बादर सिंह पंवार के अलावा भरकी, भेटा, अरोसी, देवग्राम, उर्गम, गीरा, वांसा, ल्यारी-थेंना, व सलना आदि गांवों के ग्रामीण मौजूद रहे।

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