पैनखंडा में शुरू हुई नंदाष्टमी की धूम,सजने लगी छंतोलियां ।

-------------- लक्ष्मण नेगी,-कल्पबीर।
जोशीमठ,12 सितम्बर।
पैन खंडा हिमालय में नंदा देवी जात स्वनुल  देवी जात के धार्मिक कार्यक्रम प्रारंभ । उर्गम थात, पंच गै ,,दयोखारी  थात ,  फ्यूलानारायण जात कार्यक्रम की रूपरेखा के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हो गए हैं 12 सितंबर 2021 को सभी क्षेत्रों से नंदा देवी स्वनल देवी की जाती यात्राएं कंडी छतोली के साथ प्रारंभ होगी नंदा जात के इतिहास को खंगाला जाए तो पूरा विवरण मिलता है कि कत्यूरी वंश के राजा जसधवल के समय से ही जात का कार्यक्रम होता रहा है हिमालय क्षेत्र में नंदा देवी का उत्सव बड़ा ही भव्य रूप से मनाया जाता है जोहार घाटी अल्मोड़ा पिथौरागढ़ चमोली कुरूड़ नोटी चांदपुर गढ़, बद्रीनाथ गढ़वाल लाता नंदा  उरगम की नंदा स्वनुल देवी की जात यात्रा का लंबा इतिहास मिलता है जात यात्रा छठी से आठवीं  के बीच कत्यूरी राजवंशों ने नंदा राज जात का आयोजन किया था वैसे ही पैन खंडा हिमालय में नंदा को कैलाश भेजने की परंपरा नहीं रही है यहां पैन खंडा में नंदा को मायके बुलाने की परंपरा विद्यमान है पैन खंडा क्षेत्र के अंतर्गत पांडुकेश्वर, लाता, नीती, फ्यू लानारायण क्षेत्र में नंदा को मायके की बुलाने की परंपरा सदियों से रही है। वैसे तो भगवती पर्ण खंडेश्वरी राजराजेश्वरी को नंदा कहा जाता है लोक जागरण में नंदा को ही पार्वती का रूप माना जाता है लोग जागर के अनुसार पार्वती की शादी भगवान शंकर से हुई शादी की रस्म पूरी करने में महर्षि नारद की अहम भूमिका रही है । पैन खंडा वासी नंदा अष्टमी की छठी एवं सप्तमी तिथि को नंदा को बुलाने के लिए ऊंचे हिमालय में जाते हैं वहां पर भगवती को अपने मायके का कलेवा भेंट करते हैं अपने साथ माँ नंदा को बुलाकर लाते हैं ऐसी मान्यता है कि जब पार्वती अर्थात गौरा अपने मायके के लिए आती है तो वह अपने मायके के लिए कुछ समूण-- लेकर आना चाहती है हिमालय में बर्फ के अलावा शिव के प्रतीक स्वरूप ब्रह्म कमल एवं जड़ी बूटियां ही विद्यमान है पार्वती अर्थात नंदा तय करती है कि अपने मायके के लिए पवित्र पुष्प ब्रह्म कमल को भी प्रसाद स्वरूप ले जाऊं जिसकी पूजा आज भी  पैणखंडा वासी करते हैं जब लोग जात यात्रा सप्तमी अष्टमी तिथि को अपने-अपने क्षेत्रों में जात करते है उसके बाद नवमी तिथि को अपने गांव में आकर के त्योहार मनाते हैं ब्रह्म कमल की पूजा की जाती है ।उसके बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं अलग अलग जगहों की छतोलियाँ उर्गम थात की छतौली छटवी तिथि को बंसी नारायण में रात्रि प्रवास करेगी उसी दिन पंचगै पल्ला जखोला, किमाणा, कलगोट ,द्वीग की छतोलियो का मिलन होता है बंसी नारायण में रिख उडियार मे प्रवास के बाद दूसरे दिन मेनवाँखाल में जात करते हैं रात्रि रिखउडियार में ही प्रवास करते हैं अष्टमी के दिन गांव पहुंच जाते हैं घंटाकर्ण मंदिर ,नंदा मंदिर में भव्य मेला लगता है इसी तरह फ्यू ला नारायण जात यात्रा छठी तिथि को फ़्यूला नारायण में रात्रि विश्राम करती है रात्रि भर जागर का आयोजन किया जाता है जिसमें नंदा की गाथा के अलावा देवी स्तुति की जाती है सप्तमी तिथि को भनाई नामक स्थान पर देवी की जात यात्रा संपन्न की जाती है यहां से भगवती को मायका बुलाकर फ़्यूला नारायण लाया जाता है, ब्रह्म कमल से नारायण का श्रृंगार किया जाता है अष्टमी तिथि को पुनः गांव की ओर से छतोलियाँ आ जाती है नवमी तिथि को भगवान फुल नारायण के कपाट बंद हो जाते हैं । धोखार पट्टी के लोग दसौली ब्लॉक से यात्रा शुरू होती है इस यात्रा में 1 दर्जन से अधिक गांव शामिल होते हैं जिस में कुजाऊं ,मैंकोट, कोज, खंडवारा नैल, कूडाऊ, हाट ,जैसाल, डूमक, वेमरु, स्यूण, आदि गांव सम्मिलित रहते हैं इस क्षेत्र की यात्रा नंदी कुंड के नाम से होती है हर वर्ष यह यात्रा सप्तमी तिथि को डुमक गांव से प्रारंभ होकर मनपाई बुग्याल पहुंचती है अष्टमी अष्टमी तिथि को यह यात्रा नंदी कुंड की तरफ जात करती है नंदी कुंड की ऊंचाई 16500 फीट से भी अधिक है यह यात्रा अति दुर्गम एवं कठिन है वैसे जहां-जहां भी नंदा देवी कि लोग जाति यात्रा होती है लगभग 12 से 17000 फीट की ऊंचाई तक यह यात्रा संपन्न की जाती है इस वर्ष नंदा देवी लोक जात यात्रा 12सितम्बर से प्रारंभ होकर पैन खंडा हिमालय में 17 सितंबर 2021 तक चलती रहेगी वैसे तो ब्रह्म कमल तोड़ने के  कठिन नियम है जब जात्रा हिमालय पहुंचती है 15 से 30 मिनट का समय होता है जो ब्रह्म कमल की क्यारियों में जात यात्री जाते हैं चुपके चुपके ब्रह्म कमल को तोड़ते हैं 15 से 30 मिनट के बीच क्यरियाँ मानवविहीन हो जाती है आज भी लोग परंपरा है कि नंदा अष्टमी के पर्व तक ब्रह्म कमल तोड़ना पूर्व से निषेध है। वैसे पैन खंडा हिमालय में नंदा जात का कार्यक्रम लोकपाल हेमकुंड,डाड़ो, मेरग, परसारी, बड़ागांव,थैग, नीति, मेहर गांव ,लाता सुखी भला गांव सुभाई बामणी ,लामबगड़ के अलावा उगम घाटी दर्जनों गांव में यह यात्रा होती है जोशीमठ के डाडो, सलूण डूंगरा पगनो, मोलटा के अलावा भरकी,भेटा,पिलखी, गवाणा अरोसी आदि गांव से जात यात्रा की छोतोलिया फुल नारायण की ओर जाती है इसमें एक छोतोली सलना, उर्गम से, एक पल्ला जोखोला से डुमक, पोखनी से फ़्यूला नारायण के लिए जाती है।                        

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