देहरादून।
राज्य में स्थित ग्लेशियर झीलों से संभावित खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने ग्लेशियर झीलों की निगरानी एवं जोखिम न्यूनीकरण के लिए विश्वभर में उपलब्ध अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने के निर्देश दिए हैं। रविवार को उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) पहुंचकर उत्तराखण्ड में स्थित ग्लेशियर झीलों की स्थिति तथा संभावित जोखिम की विस्तृत जानकारी ली।
आपदा प्रबंधन मंत्री ने निर्देश दिए कि ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए संबंधित विभागों, विशेषज्ञ संस्थानों एवं तकनीकी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक हो वहां अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किए जाएं, ताकि किसी भी असामान्य स्थिति का समय रहते पता लगाकर संभावित प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहले से सतर्क किया जा सके।
श्री कौशिक ने बैठक में प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा तथा बारिश के कारण उत्पन्न परिस्थितियों की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनजीवन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभाग पूर्ण समन्वय के साथ 24×7 अलर्ट मोड पर कार्य करें। उन्होंने राज्यभर में वर्षा की स्थिति, नदियों के जलस्तर, बंद सड़कों, भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों, राहत एवं बचाव कार्यों, विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति, संचार व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की विस्तृत जानकारी ली। विभिन्न जनपदों में हुई वर्षा, संभावित मौसम पूर्वानुमान तथा आगामी दिनों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाए और किसी भी आपात परिस्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र को सभी जनपदों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र खोला जाए तथा भूस्खलन संभावित एवं संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त मशीनरी पहले से तैनात रखी जाए। जिन स्थानों पर भूस्खलन अथवा मार्ग अवरुद्ध होने की संभावना अधिक रहती है, वहां पहले से पर्याप्त संख्या में जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, आवश्यक उपकरण एवं तकनीकी दल तैनात किए जाएं, ताकि मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में तत्काल यातायात बहाल किया जा सके।
जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रभावी जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ-साथ पंप एवं अन्य आवश्यक उपकरण पर्याप्त संख्या में उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ पूरी सतर्कता एवं संवेदनशीलता से कार्य करने को कहा, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। कहा कि बिजली, पेयजल एवं संचार सेवाओं की बहाली सर्वोच्च प्राथमिकता पर की जाए। यदि कहीं भी ये सेवाएं प्रभावित होती हैं तो अतिरिक्त टीमें तत्काल भेजी जाएं और वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू कर आमजन को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जिलों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत, पेयजल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सहित सभी संबंधित विभाग पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें। दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्यान्न, दवाइयों, ईंधन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण पहले से सुनिश्चित किया जाए, ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
बैठक में उपाध्यक्ष राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति श्री विनय रुहेला, उपाध्यक्ष ले. कर्नल (अ.प्रा.) रघुवीर सिंह भण्डारी, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा, यूएसडीएमए के विशेषज्ञ डॉ. पूजा राणा, रोहित कुमार, प्रतिभा पुरोहित, मोहित माथुर आदि उपस्थित रहे।

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