श्रीरामलीला महायज्ञ की पौराणिक परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं सीमांत नगरवासी

-------------- प्रकाश कपरुवाण।

 ज्योतिर्मठ।

      सीमांत धार्मिक एवं पर्यटन नगरी जोशीमठ अब ज्योतिर्मठ मे रामलीला मंचन की सनातन परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं सीमांत नगरवासी, नृसिंह-नव दुर्गा सेवा समिति "रामलीला कमेटी"द्वारा इस वर्ष भी श्रीरामलीला महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है जिसकी सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है।

       जोशीमठ मे रामलीला का मंचन प्रतिवर्ष भगवान बद्रीविशाल के कपाट खुलने से पूर्व भगवान बद्रीविशाल की सुखद यात्रा की कामना को लेकर किए जाने की धार्मिक परंपरा रही है, परंपरा के अनुसार ही भगवान बद्रीविशाल के कपाट खुलने का मुहूर्त बसंत पंचमी से रामलीला मंचन के रिहर्सल -तालीम शुरू हो जाती है और कपाट खुलने से पूर्व मंचन किया जाता है।

         इस परंपरा का आज की युवा पीढ़ी भी अपने बरिष्ठ जनों के मार्गदर्शन मे बखूबी निर्वहन कर रही है। शुक्रवार 20मार्च द्वितीय नवरात्रि पर्व के तय मुहूर्त से शुरू होने वाली रामलीला मंचन की तैयारियों को विपरीत मौसम भी प्रभावित नहीं कर सका और मंच साज सज्जा व पांडाल निर्माण कार्य को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

        नृसिंह-नव दुर्गा सेवा समिति के अध्यक्ष श्री बद्रीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी आचार्य भुवन चन्द्र उनियाल के अनुसार रामलीला मंचन की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है, भगवान बजरंग बली की कृपा से मौसम अनुकूल होगा और तय समय पर मंचन शुरू किया जा सकेगा।

    यूँ तो जोशीमठ मे रामलीला मंचन की परंपरा करीब डेढ़ सौ वर्षो से भी अधिक समय से चली आ रही है, तब जनसंख्या एवं संसाधनों की कमी के बावजूद मंचन किया जाता रहा है, हालांकि तब एक निश्चित स्थान पर न होकर सुविधानुसार अलग अलग स्थानों पर मंचन होता था। बाद मे वर्ष 1972से जोशीमठ के केन्द्र स्थान गाँधी मैदान रामलीला मंचन की शुरुवात हुई जो निरंतर जारी है।

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