------------------- प्रकाश कपरुवाण।
ज्योतिर्मठ। सड़क संपर्क मार्ग की दुर्दशा के कारण पंच बदरी एवं पंच केदारों की भूमि उर्गम घाटी शीतकालीन पर्यटकों को अपनी ओर नहीं खींच पा रही है, करीब तीन दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी हेलंग -उर्गम मोटर मार्ग की हालात दुरस्त नहीं हो सकी, नतीजन चाहते हुए भी शीतकालीन पर्यटक व यात्री इस रमणीक घाटी का दीदार करने बड़ी संख्या मे नहीं पहुँच पा रहे हैं।
हेलंग -उर्गम मोटर मार्ग जो कई आंदोलनों व प्रदर्शनों के बाद तो शुरू हुआ लेकिन शुरू से ही यह सड़क विवादों मे ही घिरी रही, कभी ठेकेदार की मनमानी तो कभी घटिया निर्माण को लेकर, इसके अलावा हर मानसून मे सड़क का तहस नहस हो जाना भी इस सड़क की नियति मे ही शामिल रही, जिसके कारण आज भी यह सड़क सुरक्षित यातायात के लिए नहीं कही जा सकती।
उर्गम घाटी प्रकृति की अनमोल धरोहर तो है ही पंच केदारों मे एक भगवान कल्पनाथ एवं पंच बदरी मे एक ध्यान बदरी का प्राचीन मंदिर एवं शिवालय है जो वर्ष भर खुले रहते हैं, लेकिन इसके वावजूद शीतकालीन यात्रा व पर्यटकों की दृष्टि से यह घाटी उपेक्षा का ही दंश झेल रही है, हालांकि अब पर्यटन महकमे द्वारा कल्पनाथ मंदिर के आस पास सौन्दरीयकरण, शोभा स्थली एवं पार्क व पर्यटक आवास गृह योजना प्रस्तावित है, पर इसका पर्यटकों व यात्रियों को तभी लाभ मिल सकेगा जब हेलंग -उर्गम सड़क संपर्क मार्ग सुरक्षित यातायात के लिए दुरस्त होगा।
उर्गम घाटी जहाँ न केवल ध्यान बदरी एवं कल्पनाथ के दर्शन होते हैं बल्कि उर्गम से फ़यूंलानारायण, भनाई बुग्याल, उर्बसी मंदिर, मुलाखर्क, सुन्दरवन व पल्ला गढ़ी सहित अनेक रमणीक स्थलों की ट्रैकिंग हो सकती है, जरूरत है इन क्षेत्रों के व्यापक प्रचार प्रसार एवं बेहतर सड़क की।
लंबी जद्दोजहद के बाद हेलंग- उर्गम सड़क मार्ग के लिए अब पीएमजीएसवाई ने करीब तेरह करोड़ की धनराशि स्वीकृत करते हुए चौड़ीकरण व डामरीकरण का कार्य शुरू हुआ है इसके अलावा लघु जल विद्युत निगम ने भी किमी दो से तीन के बीच अक्सर अवरुद्ध होने वाली सड़क की मरम्मत के लिए 84लाख की धनराशि अवमुक्त करते हुए स्वयं के स्तर से ही कार्य शुरू किया है।
उर्गम घाटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह नेगी ने घाटी के अन्य ग्रामीण प्रतिनिधियों के साथ कार्यस्थल पर कार्यदायी संस्थाओं से वार्ता कर सड़क मरम्मत, चौड़ीकरण व डामरीकरण कार्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ किए जाने की अपेक्षा की, ताकि हर वर्षात मे क्षतिग्रस्त होने वाली सड़क टिकाऊ बन सके और वर्षभर आवागमन सुचारु रहे।
अब देखना होगा कि करीब 14 करोड़ की धनराशि से इस बार किए जा रहे कार्य कितने टिकाऊ व गुणवत्तापरक होंगें, इस पर पर्यटन पर निर्भर उर्गम घाटी के लोगों की नजरें रहेंगी।
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