------------------- प्रकाश कपरुवाण।
ज्योतिर्मठ। देवभूमि उत्तराखंड राज्य गठन के रजत जयंती वर्ष पर राज्य के 25वर्षो की उपलब्धियों की चर्चा होनी थी, लेकिन 25वें वर्ष के जाते जाते इस देवभूमि को अंकिता हत्याकांड की नई चर्चा व त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की दर्दनाक हत्या ने कलंकित कर दिया है, इन दो घटनाओं ने तो देवभूमि कहे जाने वाले राज्य को भी जघन्य अपराधों वाले राज्य की श्रेणी मे ला खड़ा कर दिया है।
यूँ तो उत्तराखंड सरकार ने रजत जयंती वर्ष पर न केवल उपलब्धियों के बखान किए बल्कि विधानसभा का विशेष सत्र आहुत कर वहाँ भी उपलब्धियों पर चर्चा -परिचर्चा की, परन्तु 25वें वर्ष के अंतिम महीने मे अंकिता भण्डारी हत्याकांड के नये खुलासे एवं त्रिपुरा के छात्र चकमा की जघन्य हत्या ने पूरे देश का ध्यान देवभूमि उत्तराखंड की ओर खींच दिया है, और न केवल उत्तराखंड आंदोलित हो उठा है बल्कि पूर्वोत्तर छात्र संगठन भी न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतर गया है।
राज्य गठन के 25वें वर्ष के जाते जाते चर्चा होनी थी विकास की, चर्चा होनी थी कितने अस्पताल खुले, कितने डाक्टर नियुक्त हुए, कितने स्कूल खुले, कितनी सड़कें बनी, कितने रोजगार दिए, मानव -वन्य जीव संघर्ष व वनाग्नि रोकने के क्या उपाय हुए, और इन 25वर्षों मे राज्य मे आई भीषण आपदाओं से हमने क्या सीखा आदि आदि लेकिन चर्चा सिर्फ और सिर्फ अंकिता भण्डारी व एंजेल चकमा के हत्या कांडो की हो रही है।
इन दो जघन्य हत्याकांड़ों ने पूरे देश मे उत्तराखंड को शर्मसार कर दिया है, और यह मामला इतनी आसानी से समाप्त होने वाला भी नहीं है। जिस प्रकार केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, व सांसदों को काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए है यह इस राज्य के लिए शुभ संकेत नहीं कहे जा सकते।
समय रहते जनभावनाओं के अनुरूप ठोस कार्यवाही के निर्णय नहीं हुए तो उत्तराखंड जैसा शांत प्रदेश आंदोलन की ज्वाला मे धदक उठेगा जिसे रोक पाना नामुमकिन हो जाएगा, इसलिए जल्द से जल्द अंकिता भण्डारी की हत्या मे नये खुलासे मे सार्वजनिक हुए नामों को जाँच की परिधि मे लेने एवं त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा के फरार हत्या अभियुक्तों को सजा दिलाने का काम किया जाय ताकि राज्य का जनमानस राज्य गठन के 25वर्षों की उपलब्धियों पर चर्चा -परिचर्चा कर राज्य मे एक सकारात्मक वातावरण तैयार कर सकें।
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