आज होने वाली राज्य कैबनेट की बहुप्रतीक्षित बैठक पर जोशीमठ भू धंसाव प्रभावितों की नजरें टिकी हैं, स्थाई पुनर्वास/विस्थापन,व मुवावजा सहित सभी अन्य मांगों पर होने वाले निर्णयों के बाद आगे के आंदोलन की दिशा भी तय होगी।
भू धंसाव प्रभावित जोशीमठ के सैकड़ों प्रभावित पिछले डेढ़ महीने से राहत शिविरों मे रह रहे हैं, और सरकार से स्थाई पुनर्वास/विस्थापन व मुवावजा पर ठोस फैसले की अपेक्षा कर रहे हैं।
जहाँ एक ओर नगर के विभिन्न वार्डों मे दरारें बढ़ने का1 क्रम जारी है वहीं भू धंस को लेकर पिछले डेढ़ महीने से जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के आव्हान पर प्रभावितों व स्थानीय लोगों का आंदोलन लगातार जारी है, धरना/प्रदर्शन का क्रम भी बदस्तूर जारी है।
संघर्ष समिति द्वारा स्थाई पुनर्वास/विस्थापन, मुवावजा के साथ ही एनटीपीसी परियोजना व हेलंग-मारवाड़ी बाईपास को बन्द करने की मांग आंदोलन के पहले ही दिन से ही है।सरकार इन सभी मांगों पर क्या फैसला लेती है इस पर जोशीमठ का भविष्य भी तय होगा।
सरकारों को यह तो बताना ही होगा कि जोशीमठ भू धंसाव त्रासदी के लिए एनटीपीसी की परियोजना एवं हेलंग-मारवाड़ी बाईपास निर्माण जिम्मेदार नहीं है,और भविष्य मे एनटीपीसी की सुरंग से जोशीमठ को कोई खतरा नहीं होगा इसकी भी गारंटी देनी होगी।
संघर्ष समिति व प्रभावितो की सभी मांगों पर राज्य कैबिनेट क्या निर्णय करती है, इस पर सबकी नजरें रहेंगी।
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