संस्कृति,भाषा व परंपराओं को अक्षुण रखने के लिए बच्चों को संस्कारवान बनाना बेहद जरूरी:-कपरूवाण।।

____________ प्रकाश कपरूवाण।
जोशीमठ,04सितंबर।
सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज जोशीमठ में परिवार प्रबोधन कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व ईओ भगवती प्रसाद कपरूवाण,पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य  बसंती देवी पंवार,     रमा देवी एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य शंभू प्रसाद चमोला ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन से प्रारंभ किया। 
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यालय के अभिभावक दादा- दादी माता- पिता भाई- बहन उपस्थित हुए ।कार्यक्रम में विद्यालय के कन्या भारती की छात्राओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुतियां प्रस्तुत की गई। 
 
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के पूर्व ईओ भगवती प्रसाद कपरूवाण ने परिवार प्रबोधन के विषय में विचार रखते हुए कहा कि आज हम पाश्चात्य संस्कृत के अंधानुकरण के कारण अपने रीति रिवाज परंपराएं वेशभूषा, क्षेत्रीय व स्थानीय भाषा भूलते  जा रहे हैं, जो कि भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है, हमें अपने बच्चों को सनातन संस्कृति के आधार पर वर्णित परंपराओं से अवगत कराया जाना चाहिए,  उन्हें अपने पूर्वजों के बारे में, रीति-रिवाजों के बारे में तथा धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के बारे मे प्रबोधन कराना चाहिए।  तभी हमारी संस्कृति, भाषा,  परंपराएं व रीति- रिवाज अक्षुण्ण रह सकेंगे।
विद्यालय की प्रधानाचार्य शंभू प्रसाद चमोला ने कहा की भौतिकतावादी युग में हम अपने परिवार को समय नहीं दे रहे हैं जिसके कारण परिवार के सदस्यों के बीच में दूरी बन रही है। हमें अपने बच्चों को अपनी वंशावली, गांव का महत्व, गांव की गौरवशाली परंपरा, से परिचित कराना चाहिए, परिवार में अपनी मातृभाषा, स्थानीय भाषा में वार्तालाप करना चाहिए परिवार में भोजन, एक साथ मिलकर करना चाहिए हमारे परिवारों का विस्तार होना अच्छी बात है, किंतु विघटन नहीं होना चाहिए परिवार के बड़े बुजुर्गों का सदैव आदर करना चाहिए और बुजुर्गों द्वारा परिवार के सदस्यों का प्रबोधन करना चाहिए।
 कार्यक्रम का संचालन  भरत भंडारी  द्वारा किया गया कार्यक्रम में विद्यालय के आचार्य शारदा प्रसाद तिवाड़ी, हरेंद्र नेगी, नितिन , बिंदु देवी , चंद्रकला , आशा व सोनी  आदि उपस्थित रहे।

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