हिमालय की आराध्य देवी माँ नन्दा की पूजाएँ शुरु, ब्रह्मकमल के लिए उच्च हिमालयी बुग्यालों में पहंचे फुलारी।

---------------- प्रकाश कपरूवान ।
जोशीमठ,12 सितम्बर।
हिमालय की अघिष्ठात्री देवी माँ नन्दा का पर्व  नंदाष्टमी पर आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ हो गया है, मां नन्दा की वार्षिक पूजा के लिए फुलारी-ब्रह्मकमल पुष्पों को पूरे अनुष्ठान के साथ लाने वाले नन्दा भक्तों को ही फुलारी कहा जाता है।
मां नन्दा को ब्रह्मकमल के रुप मे मायके बुलाने की विशेष धार्मिक परम्परा का आयोजन पैनखंडा जोशीमठ के कई गांवों में होता है।यहाँ अष्टमी से पूर्व कहीं छठवीं तिथि को तो कहीं सप्तमी तिथि को गांवो से नियुक्त फुलारी ब्रह्मकमल लेने उच्च हिमालयी बुग्यालों की ओर निकलते है,।
पूरे धार्मिक अनुष्ठान के साथ नन्दा मंदिरों से फुलारियों को पूजा सामग्री के साथ   मां नन्दा को मायके बुलाने भेजा जाता है।दो दिनों तक नंगे पांव रहकर फुलारी उच्च हिमालयी बुग्याल से मां नन्दा रूपी पवित्र ब्रह्मकमल को लेकर वापस नन्दा मंदिरों में पहुंचते हैं,और शुरू होता है नंदाष्टमी का धार्मिक महोत्सव ।
आधुनिक चकाचौंध के दौर में भी नन्दा महोत्सव अपनी पहचान कायम रखे हुए है।
जोशीमठ नगर में नन्दा देवी पूजा समिति डाडो वर्षो से नंदाष्टमी  उत्सव को पूरे धार्मिक अनुष्ठान के साथ मनाती है।यहाँ भी सप्तमी तिथि को ब्रह्मकमल लेकर पहुंचने की परम्परा है,डा डो के साथ ही परसारी, मेरग,बड़ागाँव, सहित कुछ अन्य गांवों में भी सप्तमी तिथि को मां नन्दा के आवाहन की धार्मिक परम्परा है।

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